Sunday, June 26, 2016

नवीन मिश्र की कहानी "स्मृति-साधना" भाग-2

कई दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा । और धीरे धीरे समय अपनी द्रुत गति से बढ़ता गया। लोगों ने उसके स्वभाव को परखा तो पाया की वह साधु बहूत विरक्त और त्यागी पुरुष था। लोग उसके बारे में तरह तरह के कयास लगाया करते , गाँव की चौपालों में सिर्फ उसी की चर्चा होती और वह इन सब से बेपरवाह घूमा करता, यूँ ही, उदास , मौन। धीरे धीरे लोगों में वह 'मौन साधु ' के नाम से मशहूर हो गया । इस तरह महीनों बीत गये उसे इस गाँव में आये और संयोग वश इतने महीनों से गाँव एक बार भी किसी भी भौतिक या प्राकृतिक आपदा का शिकार न हुआ । भोले भाले गाँव वालों ने यह समझ लिया की यह उसी साधु का चमत्कार है । आस्था को अंधविश्वास में बदलने में के लिये जरा  भी समय नहीँ लगता ।वह साधु अभी तक गाँव वालों की श्रद्धा का पात्र तो था ही अब पूज्य भी हो गया । कुछ बुजुर्गों ने फिर कयास लगा करा एक नयी टिप्पणी की कि ये साधु जहाँ भी जाता है वहाँ खुशहाली ही खुशहाली रहती है । फिर क्या था सारे गांववालों ने मिलकर मंत्रणा की कि क्यों न इस साधु को अपने गाँव में ही रोक लिय जाये ताकि इस संत का कृपालाभ हमेशा उन्हे मिलता रहे । फिर एक दिन गाँव वालों ने मिलकर नदी के किनारे विशाल वट वृक्षों के झुरमुट में उसके लिये एक झोपडी बना दी और कुछ टूटे फूटे सामान का बंदोबस्त करा दिया ।  भोजन की जिम्मेदारी गाँव वालों ने अपने ऊपर ले ली । उनमे से प्रतिदिन कोई न कोई यथा सामर्थ्य जो भी रूखा सूखा जुटता , ले जाकर साधु की कुटी पर रख आता । और वह साधु जो पूर्ववत  घूमता रहता था अब भी सारा दिन प्रकृति की गोद में घूमता ही रहता, पर अब उसे भी एक ठिकाना मिल गया । जहाँ अपनी यात्रा से थककर वह आता और रखे  हुए भोजन को पेट में डाल कैद हो जाता अतीत की परछाइयों में , कभी हँसता तो कभी जोर जोर से रोता और इस स्मृति साधना  में रत वह सौ जाता फिर अगली सुबह की प्रतीक्षा में ।.....................
***
         शांत, सुरम्य नदी की शीतल रेती पर छिटकती चाँदनी मानो स्वयम की शुचिता पर इतरा रही है । आकाश पर विद्यमान तारों की मंडली मानो इस सुंदर श्सॄष्टि को देख बालकों की तरह आनंदित हो चमक रहे हैं । पावन सरिता की जलधारा मानो कल कल का सुरीला गान कर रही है । प्रकृति की समस्त सुंदरता मानो रात्रि की इस बेला में इस निर्जन तट पर मूर्तिमान हो नृत्य करा रही है । न कोई कोलाहल न कोई उद्वेग , मालूम पड़ता है पीट हिमालय ने अपनी  पुत्री इस नदी को जो शांति उपहार स्वरूप दी होगी वो समस्त शांति इस नदी ने इस तट पर ही सम्हाल करा रख छॊडी है । तभी तो आज इस नदी के पुलिन पर हिमालय की शांति की अनुभूति हो रही है । केवल बीच बीच में दूर किसी गाँव में कुत्तों के भौंकने का स्वर ही किसी प्राणी के उपस्थित होने की सूचना देता है ।
          नदी की धार के बिल्कुल समीप एक विशाल वट वृक्ष पूरे गर्व के साथ खडा हो इस दृश्य का साक्षी बन इसकी सुंदरता को और बढा रहा है । जिसकी शाखाओं के निवासी पक्षियों में से अधिकतर या तो निद्रामग्न है या उस स्वर्गिक दृश्य को देख पुलकित हो स्तब्ध बैठे हैं । ऐसा लग रहा हैं मानो उस स्थान पर उपस्थित प्रत्येक वस्तु को धवल चंद्रमा ने अपनी पवित्र रश्मियो से धोकर और भी स्वच्छ व निर्मल कर दिया हो । कुल मिलाकर एक अकल्पनीय , अविश्वसनीय और अप्रतिम दृश्य हैं ।
          उस विशाल वृक्ष के नीचे ही वह साधु ध्यान की मुद्रा में निर्विकार , शांत मूर्तिवत बैठा हुआ मानो आनँद की किसी अदृश्य धारा में गोते  लग रहा था । प्रमाण थे उसकी आँखों से झरते अश्रु बिंदु जो उसकी स्वर्णिम आभा को और बड़ा रहे थे ।
          सहसा वृक्ष की किसी शाखा पर किसी परिंदे ने अपन स्थान बदला तो पत्तों के खड्खडाने का धीमी सा स्वर हुआ । साधु ने धीरे धीरे अपने नेत्र खोली । आँसुओं से तर अपने चेहरे को पोंछा और एक गहरी साँस लेकर उठ खड़ा हुआ । सामने नदी की धारा अपने वेग से वह रही थी । साधु धीमी गति से चलता हुआ किनारे पर बिछी हुई रेत तक आया । कुछ डेढ़ यूँ ही खडे  खड़े उसने चारों और की सुंदरता को देखा फिर वही बैठ गया । उसका मन पुलकित होने लगा , रोम रोम रोमांचित हो उठा । वह अपलक उस जल धार को निहारने लगा । अचानक उसके कानों में एक चिर परिचित ध्वनि गूँज उठी................


क्रमशः..............

Saturday, June 11, 2016

कुरसठ युवा मंच in Action ~ Part 1

कुरसठ युवा मंच in Action ~ Part 1

कुरसठ युवा मंच का प्रभाव कुरसठ में दिखाई देने लगा है

युवा मंच जल संरक्षण पर कोर कमेटी के अहम् सदस्य अनुज तिवारी जी की अगुआई में लगातार प्रयत्नशील रहा उसका प्रभाव दिखाई देने लगा है।

अभी तक कुरसठ में पानी सप्लाई वाले सार्वजानिक नलो की टोटियां पिछले काफी दिनों से गायब थी जिसकी वजह से जब सप्लाई दी जाती थी तो धाराप्रवाह पानी की बर्बादी होती रहती थी। इस पानी की बर्बादी सभी को अखड़ती थी परंतु सभी मूकदर्शक बने हुए थे कुरसठ युवा मंच के गठन से युवाओे को एक संगठन में शक्ति का आभास हुआ है पानी की समस्या को एक मुख्य समस्याओ में इंगित करके सर्वप्रथम पानी के व्यर्थ बहाव को रोकने के लिए टाउनएरिया को टोटियां लगाने का सुझाव दिया गया जिसे कुरसठ टाउनएरिया ने बखूबी निभाया और कम से कम समय में टोटियां लग गयी।

टोटी लगाने से प्रभाव
- पहले पुरे गॉव को सप्लाई के लिए 2 -3 बार टँकी भरनी होती थी जिससे पानी का दोहन ज्यादा होता था वह अभी मात्र एकबार दोहन से ही पुरे गॉंव में सप्लाई के लिए पर्याप्त पानी हो जाता है।

क्या कहते है निवासी
सुनीत कुमार
टोटियां लगने से निस्संदेह जल संरक्षण होगापरंतु अभी देखना है कि ये टोटियां कब तक लगी रह पाएंगी
नितिन तिवारी
कुरसठ के लोगो को ही जल संरक्षण में अपनी
अपनी भागीदारी देनी होगी और इसे सामाजिक  समझकर व्यक्तिगत समझना होगा
अनुज तिवारी
पानी की समस्या हमेशा से खटकती रही है मुझे। टोटियां लगने से कुछ मन को शांति पहुची है परंतु अभी भी पूर्ण समस्या का निदान नही हुआ है बेहतर तो तब होगा जब लोग खुद पानी के प्रति जागरूक होंगे।
पुष्पेन्द्र

सभी साथ जाये तो कोई भी समस्या समस्या रहेगी ही नही युवा मंच की पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए शुभकामनाये
शिशुपाल प्रजापति
कुरसठ युवा मंच और कुरसठ टाउनएरिया दोनों ही जल संरक्षण पर नकेल कसने के लिए इस कार्य में बधाई के पात्र है।
सद्दाम
एक अच्छा और महत्वपूर्ण कदम मंच और टाउन एरिया का अभी जनता को इस मुहीम से साथ आने की शख्त जरूरत है।

क्या है कुरसठ युवा मंच

कुरसठ युवा मंच हरदोई जिले के माधोगंज ब्लॉक में स्थित नगर पंचायत कुरसठ के युवाओ द्वारा शुरू किया गया गैरराजनीतिक, गैरसरकारी, ऊर्जावान टेक्नोलॉजिकल मंच है जो की गॉंव से बाहर रह रहे युवाओ द्वारा टेक्नोलॉजी के उचित समायोजन का एक शानदार उदाहरण है। इस मंच द्वारा गॉंव की समस्याओ के निवारण की कोशिस, नए फॉर्म या रिजल्ट की जानकरियाँ, रोजगार की जानकरियाँ, आधुनिक कृषि की जानकारियां, सरकारी योजनाओ की जानकारियां देने की कोशिस की जाती है। अभी तक लगभग 250 लोग इस मंच में सदस्य है। पुरे मंच को कोर कमेटी द्वारा सञ्चालन किया जाता है जिसके सदस्य शिशुपाल प्रजापति जी, अनुज तिवारी जी, प्रतिवेन्द्र सिंह जी, राघवेंद्र पटेल जी, पवनीश जी, सद्दाम जी और आलोक कुमार जी है।


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