Thursday, February 18, 2016

अपनी अक़्ल लगाओ, दिखावे पर मत जाओ


-अनुज तिवारी*
बहुत कश्मकश है जीवन में।  आँखों देखा और कानों सुना भी सत्य कितनी सफाई से झुठला दिया जाता है। जो सर्वथा झूठ है, गलत है या यूँ कहें कि मन को अशान्त करने वाला है वही अर्धसत्य कुछ कलमकारों और  बुद्धजीवियों के द्वारा पत्रकारिता विधा या कहें ऐसी तकनीक से परोसा जा
ता है कि इंसान जरा-सा अपने विवेक से चूका नहीं वह उन्हीं घड़ियाली कलमकारों की जमात में खुद को स्थिर और सुखद महसूस करता है।

वैसे तो कई मौके आये होंगे जीवन में लेकिन जो ज़ेहन में बिल्कुल ताज़ा है, दुःखद है। पहला हम सबके प्रेरणाश्रोत भारत माँ के सच्चे सपूत और मरते दम तक कर्तव्यपरायणता के अद्भुद व अद्वितीय उदाहरण श्री कलाम जी । दूसरा  2.4% ऋणात्मक तापमान में 35 फीट बर्फ की मोटी चादर ओढ़कर भी उफ़ न करने वाले और मौत को चकमा देते हुए कहते रहे अये मौत रुक अभी मुझे इस मिट्टी, मेरी माँ का कर्ज उतारने के लिये कुछ और पल दे ताकि जाते-जाते लोगों के भीतर हौसले का प्रकाश-पुंज उद्दीपित कर सकूँ और वह भारत माँ का लाल अपने कारनामे में सफल भी हुआ और अमर भी।

इन दोनों हृदयविदारक घटनाओं में ऐसा लगा वाकई देशवासियों ने बहुत कुछ खोया है और एकता की ऐसी बानगी पेश की मानो अब वाकई देश में बड़े बदलाव होंगे लोंगों के दिल पिघलेंगे।

अभी सुनने को जो मिल रहा है वो है #हरहाथतरक्की #पूर्णस्वराजभ्रष्टाचारमुक्ति #सबकासाथसबकाविकास #यूपीमेंहैजुर्मकम आदि-आदि वे जुमले ही तो रह गए हैं। अफ़सोस! कहाँ गया वो देशप्रेम, #जेएनयू जैसा कद्दावर प्रांगड़ जिसकी रग-रग सराबोर है वो आतंकवाद की तीक्ष्ण महक से जहाँ अफजलों, याकूबों को जी से सम्बोधन हो रहा और माँ भारती को गालियां दी जा रही हैं। ये हमारे आजाद और  'सर्वधर्म समभाव' भारत के दर्शन नहीं हैं या तो ये पढ़े-लिखे युवा पथ भ्रमित हो चुके हैं, या फिर पैसों के लालच में अपनी माँ का सौदा करने निकले हैं ।

शहीदेआजम, पं0 जी, नेता जी, गाँधी जी जैसे तमाम कद्दावर शख्सियतों ने अपनी जवानी, अपनी उम्र, अपना परिवार यहाँ तक कि  खुद की जान की बाज़ी  लगा दी किसके लिये माँ के लिये माँ भारती के लिये। जो पढ़-लिखकर माँ-बाप का हाथ बटाते, सहारा करते वो आज अफजलों के लिये बग़ावत कर रहे हैं इनको कठोर से कठोर सजा मिले और अवश्य मिले।

बात अभी जारी है.... 

जैसी करनी वैसी भरनी बड़ों का है ये कहना।
तू खुद ही ये फैसला कर ले तुझे है कैसे रहना।।

*लेखक पेशे से सिविल इंजीनियर हैं.

9 comments:

  1. अच्छा लिखा है अनुज भाई! दूसरे भाग का इन्तजार रहेगा...

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  2. बहुत खूब अनुज जी ।
    काबिलेतारीफ !!!

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  3. बहुत खूब अनुज जी ।
    काबिलेतारीफ !!!

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  4. बहुत बुनियादी लेख अनुज भाई सराहनीय ।

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  5. अति उत्तम लेख है बहुत बहुत काबिले तारीफ भाई ...

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  6. अवचनीय और सराहनीय लेख

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    1. आपकी हौसलाअफजाई का बहुत बहुत आभार

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